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Supreme Court : क्या शादी के बाद पार्टनर किसी दूसरे से बना सकता है रिलेशन, जानिए क्या कहता है कानून

Supreme Court : कुछ लोग शादी से पहले रिलेशन( relation ) में होते हैं तो ऐसे में क्या शादी के बाद भी वे अपने पार्टनर के अलावा किसी अन्य के साथ संबंध बना सकते हैं। आज हम आपको इस खबर में बताने वाले हैं कि शादी के बाद पार्टनर किसी अन्य के साथ रिश्ता बना सकता है या नहीं और कानून इस बारे में क्या कहता है। चलिए नीचे खबर में जानते हैं पूरी जानकारी.
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Supreme Court : क्या शादी के बाद पार्टनर किसी दूसरे से बना सकता है रिलेशन, जानिए क्या कहता है कानून

NEWS HINDI TV, DELHI: पत्नी का था अफेयर( Affair ), पति का था दूसरे महिला से संबंध, पत्नी ने मांगा तलाक( Divorce ), जैसी खबरें अक्सर हम अखबरों में पढते हैं। या आसपास सुनने को मिलती हैं। कई बार इस तरह के संबंध के चलते पति या पत्नी डिप्रेशन में चले जाते हैं। उन्हें समझ में नहीं आता क्या किया जाए। समाधान पर जाएं, उससे पहले जान लेते हैं कि क्या शादी के बाद किसी दूसरे के साथ संबंध बनाना अपराध है?


शादी के बाद किसी दूसरे के साथ संबंध बनाना अपराध है?


सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court News ) IPC के Section 497 को रद्द कर चुका है। ये सेक्शन शादी के बाद दूसरे के साथ संबंध बनाने को अपराध बनाता था। कोर्ट ने साफ कहा है कि Adultery यानी शादी के बाद किसी दूसरे से संबंध बनाना जुर्म नहीं है। अब सवाल ये आता है कि अगर Adultery अपराध नहीं है तो क्या दूसरा पार्टनर चुपचाप ये सब देखता रहे। कुछ नहीं कर सकता। जी नहीं, ऐसा बिलकुल भी नहीं है। अगर पति या पत्नी का किसी दूसरे के साथ संबंध है तो दूसरे पार्टनर( Partener ) को कानून के तहत अधिकार मिला हुआ है।


शादी के बाद मेरे पार्टनर का है दूसरे के साथ संबंध, क्या करूं?


मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट( Supreme Court Decision ) के वकील संदीप मिश्रा बताते हैं कि शादी के बाद कोई भी पार्टनर किसी दूसरे के साथ संबंध बनाता है तो दूसरा पार्टनर उससे तलाक ले सकता है। Adultery तलाक का एक बड़ा आधार है।


उन्होंने आगे ये भी कहा कि अब Adultery यानी विवाह के बाद किसी दूसरे के साथ संबंध गलत नहीं है। लेकिन इस आधार पर दूसरा पार्टनर तलाक ले सकता है। कुल मिलाकर बात ये है कि अगर आपके पति या पत्नी का किसी दूसरे के साथ संबंध है, तो आप कोर्ट जाकर तलाक मांग सकते हैं।


आपको बता दूं, सुप्रीम कोर्ट( Supreme Court updates ) के फैसले से पहले IPC के सेक्शन 497 के तहत संबंध बनाने वाले पुरुष को ही सजा मिलती थी। महिला इसमें दोषी नहीं मानी जाती थी। संबंधित महिला के पति की शिकायत पर ही मामला दर्ज होता था। इसमें एक तरह से असमानता थी।