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Ancestral Property Claim Time : पैतृक संपत्ति पर दावा करने के लिए मिलता हैं कितना समय, जानिए कानूनी नियम

Ancestral Property Claim Time : आपको बात दें कि अधिकतर लोगों में प्रोपर्टी से जुड़े कुछ जरूरी नियमों और कानूनों  (property related rules and regulations) को लेकर जानकारी का अभाव होता है। इसी के चलते आज हम आपको अपनी इस खबर के माध्यम से पैतृक संपत्ति से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी देने जा रहे है। आखिर पैतृक संपत्ति पर दावा करने के लिए कितना समय मिलता हैं। जान लें ये जरूरी बात वरना हाथ से निकल जाएगी प्रोपर्टी...
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Ancestral Property Claim Time : पैतृक संपत्ति पर दावा करने के लिए मिलता हैं कितना समय, जानिए कानूनी नियम

NEWS HINDI TV, DELHI: Ancestral Property Claim Time : संपत्ति संबंधित नियमों और कानूनों (property related rules and regulations) को लेकर लोगों में अक्सर जानकारी का अभाव होता है. वह इनसे जुड़े सवालों में उलझे रहते हैं. जानकारी के अभाव के चलते ही आमतौर पर संपत्ति संबंधी विवाद (property disputes) होते हैं.

ऐसे में यह जरूरी है कि लोगों को संपत्ति संबंधी नियमों-कानूनों (property related rules and regulations) के बारे में सामान्य समझ हो. ऐसा ही एक मुद्दा पुश्तैनी संपत्ति है. बता दें कि पुश्तैनी संपत्ति (ancestral property) पर चार पीढ़ियां दावा कर सकती हैं. इस दावे के लिए एक निश्चित समय मिलता है. उसके बाद पैतृक संपत्ति (ancestral property) पर दावे का अधिकार खत्म हो जाता है.

अब आते हैं इस लेख के मुख्य सवाल पर कि कितने साल तक पुश्तैनी संपत्ति (ancestral property) पर दावा कर सकते हैं. कानून के अनुसार, ऐसा केवल 12 वर्ष तक किया जा सकता है. अगर किसी को लगता है कि किसी संपत्ति में उसका पैतृक अधिकार है और उसे गलत तरीके वसीयत से बाहर किया गया है तो वह 12 साल के अंदर कोर्ट में जाकर न्याय मांग सकता है. अगर वह ऐसा करने में असफल होता है तो उसका पुश्तैनी संपत्ति पर अधिकार खत्म हो जाएगा. इसके बाद अगर व्यक्ति के  पास वाजिब कारण है तभी कोर्ट उसकी सुनवाई करेगा अथवा वह संपत्ति उसके हाथ से निकल जाएगी.

क्या छिन सकता है पैतृक संपत्ति में अधिकार:

नहीं, ऐसा करना आसान नहीं है. माता-पिता अपनी संतान को केवल अपनी कमाई हुई संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं. हालांकि, कुछ मामले ऐसे देखे गए हैं जब कोर्ट ने बच्चे को पैतृक संपत्ति (ancestral property) से भी बेदखल करने की अनुमति दी है. परंतु, यह अपवाद होते हैं और इसमें कोर्ट कचहरी के काफी चक्कर लगते हैं. तब भी यह शत प्रतिशत तय नहीं होता कि कोर्ट का फैसला माता-पिता के पक्ष में चला ही जाएगा.

क्या होती है पुश्तैनी संपत्ति:

आपके पिता, दादा या परदादा से मिली संपत्ति (property inherited from great grandfather) को पैतृक संपत्ति (ancestral property) कहा जाता है. इसकी एक और शर्त ये है कि 4 पीढ़ियों तक परिवार में कोई अलगाव नहीं होना चाहिए. अगर एक भी पीढ़ी में घर में बंटवारा होता है तो संपत्ति पैतृक नहीं रह जाएगी. इसका मतलब है कि माता-पिता अपनी संतान को अब विरासत में मिली संपत्ति से भी बाहर कर सकते हैं. गौरतलब है कि विरासत में मिली हर संपत्ति पैतृक/पुश्तैनी नहीं होती है.